जब संग होता हुं 

देखता हुं तुझे

तो लब लडखडा उठते हैं

ओडता हुं तुझे 

तो बदन फडफडा उठते हैं

समेटता हुं तुझे

तो सिलवटें बन उठते हैं

चादर सी है तु

बीझाता हुं तुझे

तो गुलमोहरे मैदान में उग उठता हुं

कैसे कहुं तुझसे मैं

तेरे संग

मैं रोज खिल उठता हुं

Standard

Yaad – Fiaz Ahmad Faiz

Kab Yaad Main Tera Sath Nahi
Kab hath main tera hath nahi,
sad shuker ki apni raaton main,
ab hijar ki koi raat nahi,
mushkil hain agar halaat wahan,
dil beech aayen jaan dey ayen,
dil walo kocha-e-jaana main,
kia aise b halaat nahi?
jis dhaj se koi maqtal main gaya,
wo shaan salaamat rehti hai,
yeh jaan to aani jaani hai,
iss jaan ki koi baat nahi,
medaan-e-wafa darbaar nahi,
yahaa naam-o-nasab ki pooch kahan,
aashiqi to kisi ka naam nahi,
kuch ishq kisi ki zaat nahi,
gar bazi ishq ki bazi hai,
jo chaho laga do dar kaisa,
gar jeet gaye to kia kehna,
haarey b bazi to maat nahi….

Kab Yaad Main Tera Sath Nahi…

Standard

Ultreation 

Ultreation is always painfull. It sakes u from top to bottom inside out. U have now no choice to live with it. It suck u as much as u always feel thrusts in deep soul. The soul which reminds u your dark desire and your sweet thrust for life giving water. It’s just u with u who have nothing say to you. Here your narssiste behavior show to u. 

Standard

​इंसान की इंसानियत…. 

एक रोटी के चककर में कब इंसानियत की जमात मर गयी 

कब ऊपर वाले के नाम पर, रूह की खाल बेचते बेचते, फांसी की आदत सी हो गयी 

काम के बाद, रासते के कोने में लोटे, नितांत सांस लेकर,कब मैने घर की खुसी मारदी 

कैसे हुआ एेसा , किसके लिये हुआ एेसा, कब थमेगा ये सैलाब, इन नकली विशवासों की मौत का 

मारा रहा मैं कितने इंसानों को मेरे अंदर और बाहर, वादों की झुटे आहुतियों पर 

न जाने कब जगेगा मेरे अंदर का लापता इंसानियत का इंसान।

Standard

बहाव 

जब देखो तुम इस पार – उस पार करते रहते 

एक बार रूक के सोचो, कौन सा पार असली है 

जहां औरौं का आना मना है 

जहां सिरफ तुमहारा आना – जाना है

जहां हिसाबों का खाता बदलता है 

जहां बराबरी का बदलाव तुमहारा है

जहां सही-गलत का परयोग तुमहारा है 

जहां ईशवर से पहले, अनदूरीनी इंसान तुमहारा है 

जहां बोलने का न-अंत तुमहारा है 

जहां जोर गुलाम नहीं, और जबरदसती का अंत तुमहारा है

बस एक बार चलना और चलते रहना सिरफ तुमहारा है 

Standard

Seeing 

​Seeing beyond visible, is the Dream. 

Seeing beyond dream, is the You. 

Seeing beyond you, is the Beginning of you. 

Seeing beyond beginning of you, is the Remains of you. 

Seeing beyond remains of you, is the Life about you. 

Standard